Benefits of SHG: महिलाओं के लिए आर्थिक आजादी का रास्ता

Benefits of SHG


आज के दौर में महिलाएं घर की चारदीवारी से निकलकर समाज और अर्थव्यवस्था में अपनी पहचान बना रही हैं। इसमें सबसे बड़ी भूमिका स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) ने निभाई है। यह केवल 10-20 महिलाओं का समूह नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच है जहाँ महिलाएं एक-दूसरे का हाथ पकड़कर गरीबी से बाहर निकलती हैं।अगर आप एक महिला है तो यह आपके लिए एक सुनहरा मौका है|

भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) योजना के तहत, इन समूहों को न केवल आर्थिक मदद मिलती है, बल्कि उन्हें बिजनेस शुरू करने के लिए ट्रेनिंग और बाजार भी उपलब्ध कराया जाता है। यदि आप भी एक महिला हैं और आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं, तो स्वयं सहायता समूह से जुड़ना आपके जीवन का सबसे बड़ा और सकारात्मक मोड़ साबित हो सकता है| हम इस लेख  से आपको इसकी खूबियां बताने जा रहे हैं|

आर्थिक लाभ: बचत और कम ब्याज पर ऋण

1. नियमित बचत और सामूहिक फंड

 समूह से जुड़ने पर सबसे पहला फायदा यह होता है कि महिलाएं बचत करना सीख जाती हैं| हर महीने 100-200 रुपये जैसी छोटी राशि जमा करने से धीरे-धीरे एक बड़ा 'सामूहिक फंड' तैयार हो जाता है। यह फंड इकट्ठा हो के  जिसको सहायता होती है उसको प्रदान हो जाता है|

 2.साहूकारों से मुक्ति और कम ब्याज पर ऋण

  •  समूह में यह होता है कि जो पैसा इकट्ठा हुआ होता है उसमें से आप लोन ले सकते हैं बहुत ही कम ब्याज दर पर मिलता है| जहां बैंक 5 से 10%  प्रति माह  ब्याज लेते हैं, वही समूह 1 से 2% तक ही लेते हैं|

  • यहाँ लोन लेने के लिए किसी जमीन या जेवर को गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती, केवल समूह के सदस्यों की आपसी सहमति ही काफी है।

 बैंक क्रेडिट लिंकेज (Bank Credit Linkage)

 जब आपका  स्वयं सहायता समूह सफलता पूर्वक 6 महीने तक चल जाता है तब बैंक  बैंक क्रेडिट लिकेज के माध्यम से समूह को कम ब्याज पर लोन देता है|

  • शुरुआत में यह लोन 1-2 लाख रुपये का हो सकता है, जो समय पर चुकाने के बाद 5-10 लाख रुपये तक बढ़ सकता है।

  • इस पैसे का उपयोग समूह की महिलाएं मिलकर कोई बड़ा व्यापार या कुटीर उद्योग शुरू करने के लिए कर सकती हैं।

 सरकारी फंड और सब्सिडी का लाभ (RF और CIF)

स्वयं सहायता समूह  आपके द्वारा जमा किए गए पैसे पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि भारत सरकार का राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) समूहों को मजबूत बनाने के लिए सीधे उनके बैंक खाते में आर्थिक सहायता भी भेजता है।  भेज यह दो प्रकार से भेजे जाते हैं:

1. रिवॉल्विंग फंड (Revolving Fund - RF)

जब आपका समूह 3 से 6 महीने पुराना हो जाता है और नियमित बैठकें करता है, तो सरकार समूह को  प्रोत्साहन के रूप में ₹15,000 से ₹20,000 का रिवॉल्विंग फंड देती है।

  • उद्देश्य: यह पैसा समूह के 'कॉर्पस' (पूंजी) को बढ़ाने के लिए दिया जाता है। जिससे आपके समूह में थोड़ा और पैसा बढ़ जाए|

  • विशेषता: इस पैसे को सरकार को वापस नहीं करना पड़ता।  इसे आप समूह के सदस्यों को छोटी लोन की तरह दे सकते हैं जिससे आपको ब्याज पर कमाई भी हो सकती है और उत्कमई को अपने साथियों से बनता भी सकते हैं|  इसके अलावा आप इसे छोटा सा रोजगार भी शुरू कर सकते हैं|

2. कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (Community Investment Fund - CIF)

यह समूह को मिलने वाली एक बड़ी राशि है। जब कोई भी समूह बेहतर प्रदर्शन करता है और अपना 'माइक्रो क्रेडिट प्लान' (MCP) तैयार कर लेता है, तो सरकार उसे ग्रामीण संगठन के माध्यम से समूह को ₹1.10 लाख से ₹1.50 लाख तक का CIF फंड प्रदान करती है।

  • उद्देश्य: इस फंड का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आजीविका (Livelihood) से जोड़ना है। और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करना

  • लाभ: इस पैसे का उपयोग महिलाएं सिलाई मशीन खरीदने, पशुपालन करने या छोटा स्टोर खोलने जैसे कार्यों के लिए कर सकती हैं, लघु उद्योग स्थापित करना या अन्य किसी प्रकार के छोटे बिजनेस शुरू करना जिससे उनकी कमाई में बढ़ोतरी हो सके|

3. ब्याज सुब्वेंशन (Interest Subvention - ब्याज में छूट)

सरकार SHG महिलाओं को बहुत कम ब्याज पर बैंक लोन उपलब्ध कराती है। यदि समूह समय पर बैंक का पैसा चुकाता है, तो केंद्र और राज्य सरकारें ब्याज में भारी छूट (Subvention) देती हैं, जिससे  आपका लोन पर  ब्याज दर 0% से 4% तक ही रह जाती है। और आपको इसे लौटने में भी आसानी होती है|

कौशल विकास और मुफ्त प्रशिक्षण (Skill Training & Capacity Building)

स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ने का एक और बड़ा फायदा यह है कि सरकार महिलाओं को केवल पैसा ही नहीं देती, बल्कि उन्हें हुनरमंद भी बनाती है। इसके लिए विभिन्न सरकारी संस्थाएं मुफ्त में ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करती हैं:

1. RSETI के माध्यम से मुफ्त ट्रेनिंग

सरकार द्वारा संचालित RSETI (Rural Self Employment Training Institutes) के जरिए समूह की महिलाओं को उनके पसंद के क्षेत्र में 15 से 30 दिनों की फ्री ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें रहना और खाना भी मुफ्त होता है।

  • ट्रेनिंग के विषय: सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, मशरूम की खेती, मोमबत्ती बनाना, अगरबत्ती निर्माण, और मोबाइल रिपेयरिंग जैसे 60 से ज्यादा कोर्स।

2. कृषि और पशुपालन का प्रशिक्षण

जो महिलाएं  खेती गृहस्ती से जुड़ी हैं, उन्हें कृषि सखी के माध्यम से नई तकनीक, जैविक खाद बनाने और उन्नत बीजों के इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही,  दूध उत्पादन और बकरी पालन के लिए पशु सखी द्वारा उचित देख-रेख करने का प्रशिक्षण मिलता है।

3. डिजिटल और वित्तीय साक्षरता

आज के डिजिटल युग में  शिक्षित महिलाओं को 'डिजी पे' (DigiPay) और ऑनलाइन बैंकिंग चलाना सिखाया जाता है। उन्हें यह भी सिखाया जाता है कि अपने बिजनेस का हिसाब-किताब मोबाइल पर कैसे रखें और डिजिटल भुगतान कैसे स्वीकार करें। और उन्हें डिजिटल साक्षरता भी दी जाती है|

4. मार्केटिंग और पैकेजिंग की समझ

अगर आप कोई उत्पाद (जैसे अचार, पापड़ या हस्तशिल्प) बना रही हैं, तो सरकार आपको  प्रशिक्षण के माध्यम से सिखाती है कि उसकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग कैसे करें ताकि वह बड़े शहरों के शोरूम में बिक सके। इसके अलावा, सरकारी मेलों (जैसे सरस मेला) में अपनी दुकान लगाने और लोगों तक आपका सामान पहुंचाने में बेहद दिन मदद करता है|

सामाजिक सुरक्षा और आत्मविश्वास में वृद्धि

स्वयं सहायता समूह केवल पैसों का लेन-देन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के व्यक्तित्व को पूरी तरह बदल देता है। इसके कुछ अनमोल सामाजिक लाभ यहाँ दिए गए हैं:

1. आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता (Leadership)

समूह की साप्ताहिक बैठकों में हिस्सा लेने से महिलाओं की झिझक खत्म होती है। वे अपनी बात रखना, हिसाब-किताब करना और समूह के मुद्दों पर निर्णय लेना सीखती हैं। कई महिलाएं समूह के माध्यम से अपनी पहचान बनाकर आगे चलकर ग्राम प्रधान या पंचायत प्रतिनिधि के रूप में उभरती हैं।

2. सरकारी योजनाओं तक आसान पहुँच

समूह की महिलाओं को सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ सबसे पहले मिलता है। जैसे:

  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और सुरक्षा बीमा योजना

  • आयुष्मान भारत कार्ड बनवाने में प्राथमिकता।

  • पेंशन योजनाओं और उज्ज्वला योजना का आसान लाभ।

3. 'लखपति दीदी' बनने का सपना

सरकार का लक्ष्य है कि हर समूह की महिला को 'लखपति दीदी' बनाया जाए, यानी उसकी सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपये हो। समूह से जुड़कर महिलाओं को जो सामाजिक सम्मान और पहचान मिलती है, वह किसी भी धन से बढ़कर है।

सामाजिक सुरक्षा एवं आत्मविश्वास में  वृद्धि


स्वयं सहायता समूह केवल वित्तीय लेनदेन का माध्यम नहीं हैं, अपितु यह महिलाओं के व्यक्तित्व में समग्र परिवर्तन लाते हैं। इसके कुछ अमूल्य सामाजिक लाभ निम्नलिखित हैं:

1. आत्मविश्वास एवं नेतृत्व क्षमता (Leadership) 

समूह की साप्ताहिक बैठकों में सक्रिय भागीदारी से महिलाओं की संकोच वृत्ति समाप्त होती है। वे अपनी बात को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना, वित्तीय लेखा-जोखा समझना और समूह संबंधी विषयों पर निर्णय लेना सीखती हैं। कई महिलाएं समूह के माध्यम से अपनी पहचान स्थापित कर भविष्य में ग्राम प्रधान अथवा पंचायत प्रतिनिधि के रूप में उभरती हैं।

2. शासकीय योजनाओं तक सुगम पहुँच

समूह से जुड़ी महिलाओं को सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर प्राप्त होता है। उदाहरणार्थ:

  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और सुरक्षा बीमा योजना

  • आयुष्मान भारत कार्ड बनवाने में वरीयता।

  • पेंशन योजनाओं और उज्ज्वला योजना का सरलता से लाभ।

3. 'लखपति दीदी' बनने का संकल्प

सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक समूह की महिला को 'लखपति दीदी' बनाया जाए, जिसका तात्पर्य है कि उनकी वार्षिक आय न्यूनतम 1 लाख रुपये हो। समूह से जुड़कर महिलाओं को जो सामाजिक सम्मान और पहचान प्राप्त होती है, वह किसी भी धन-संपदा से कहीं अधिक मूल्यवान है।

 निष्कर्ष

 हमने इस लेख में आपको स्वयं सहायक  समूह के अनेक लाभ बताया है अगर आप इसके बारे में और जानना चाहते हैं तो हमारे दूसरे लेख पर जाकर इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

 अगर आप स्वयं सहायक ग्रुप में जोड़ना या बनना चाहते हैं तो हमारे इस  लेख को  देख कर जुड़ सकते हैं धन्यवाद



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