VB-GRAMG और MGNREGA में क्या और कितना अंतर है? पूरी जानकारी

 

MGNREGA
VB-GRAMG और MGNREGA

भारत में ग्रामीण रोजगार लंबे समय से एक बड़ी सामाजिक–आर्थिक आवश्यकता रहा है। वर्ष 2005 में शुरू हुई MGNREGA योजना ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम मजदूरी आधारित रोजगार प्रदान किया।

लेकिन बदलती अर्थव्यवस्था, जलवायु संकट, कौशल की बढ़ती जरूरत और Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य को देखते हुए सरकार के स्तर पर एक नया नीति-आधारित ढांचा / प्रस्ताव सामने आया है, जिसे
Viksit Bharat Guarantee for Rojgar and Ajivika Mission (Gramin) यानी VB-GRAMG कहा जा रहा है।

यह लेख VB-GRAMG और MGNREGA के बीच अंतर, उनकी खूबियां-कमियां और आम लोगों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को सरल भाषा में समझाता है।

VB-GRAMG और MGNREGA में मुख्य अंतर

बिंदु

VB-GRAMG

MGNREGA

रोजगार के दिन

125 दिन प्रति ग्रामीण परिवार

100 दिन प्रति ग्रामीण परिवार

प्रकृति

रोजगार + आजीविका

केवल मजदूरी रोजगार

कार्य क्षेत्र

4 स्पष्ट प्राथमिक क्षेत्र

बिखरे हुए कार्य

फंडिंग सिस्टम

Normative Funding (अनुमान योग्य)

Demand-based (अनिश्चित)

कृषि समर्थन

बुआई/कटाई में 60 दिन का विराम

स्पष्ट प्रावधान नहीं

पारदर्शिता

उन्नत डिजिटल निगरानी (प्रस्तावित)

सीमित डिजिटल/मैनुअल

लक्ष्य

आत्मनिर्भर गांव

अस्थायी आय समर्थन

VB-GRAMG और MGNREGA विस्तार से जानिए

MGNREGA

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) वर्ष 2005 में लागू हुआ। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को हर वर्ष 100 दिनों का मजदूरी वाला रोजगार उपलब्ध कराना है। यह एक कानूनी अधिकार आधारित योजना है।

MGNREGA का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण गरीबी और बेरोजगारी को कम करना तथा गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकना है। इसमें पुरुष और महिलाओं को समान मजदूरी दी जाती है और भुगतान सीधे बैंक या डाक खाते में किया जाता है।

तालाब निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, मेड़बंदी और वृक्षारोपण जैसे कार्य इसके अंतर्गत आते हैं। यह योजना ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभाती है।

VB-G
RAMG

विकसित भारत की राम जी (VB-GRAMG) को एक भविष्य उन्मुख और नीति-स्तरीय पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत को केवल मजदूरी तक सीमित न रखकर कौशल, स्वरोजगार और स्थायी आय से जोड़ना है।

इसका फोकस ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीक और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से लंबे समय तक आजीविका के अवसर देना है। इसमें कौशल विकास, छोटे उद्यम, डिजिटल जुड़ाव और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की सोच शामिल है।

रोजगार की अवधि और गारंटी 

  • MGNREGA: 100 दिन का कानूनी रोजगार

  • VB-GRAMG: 125 दिन का प्रस्तावित रोजगार, जिससे ग्रामीण आय में सीधा लाभ हो सकता है

कार्यों की प्रकृति 

VB-GRAMG में कार्यों को चार प्राथमिक क्षेत्रों में बांटने का प्रस्ताव है:

  1. जल सुरक्षा

  2. ग्रामीण अवसंरचना

  3. आजीविका अवसंरचना

  4. जलवायु सहनशीलता

जबकि MGNREGA में कार्य श्रेणियाँ अधिक बिखरी हुई हैं और दीर्घकालिक रणनीतिक फोकस सीमित रहता है।

VB-GRAMG और MGNREGA में पैसा कैसे मिलता है?

MGNREGA में फंडिंग मांग आधारित होती है। पहले काम की मांग जाती है, फिर बजट जारी होता है, जिससे कई बार भुगतान में देरी और अनिश्चितता होती है।

VB-GRAMG में Normative Funding का प्रस्ताव है, यानी बजट पहले से तय रहता है। इससे काम की योजना बनाना आसान होता है और रोजगार व भुगतान ज्यादा सुरक्षित और नियमित हो सकते हैं।

राज्य और केंद्र की भागीदारी

  • VB-GRAMG में 60:40 लागत साझेदारी का प्रस्ताव है

  • कुछ विशेष राज्यों के लिए 90:10 का प्रावधान

  • राज्यों को कृषि मौसम के दौरान 60 दिन तक काम रोकने की सूचना देने का अधिकार

निगरानी और पारदर्शिता 

VB-GRAMG में:

  • उन्नत डिजिटल और डेटा-आधारित निगरानी

  • Real-time dashboards (प्रस्तावित)

  • अनिवार्य social audit

यह व्यवस्था MGNREGA की मौजूदा निगरानी प्रणाली से अधिक मजबूत मानी जा रही है।

VB-GRAMG और MGNREGA: खूबियां और कमियां

VB-GRAMG की खूबियां

  • अधिक रोजगार दिन (125)

  • आजीविका आधारित दृष्टिकोण

  • कृषि मौसम के अनुसार कार्य

  • तकनीक-आधारित पारदर्शिता

  • Viksit Bharat 2047 से जुड़ा विजन

VB-GRAMG की कमियां

  • नया ढांचा होने से क्रियान्वयन चुनौती

  • राज्यों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की जरूरत

MGNREGA की खूबियां

  • मजबूत कानूनी आधार

  • व्यापक कवरेज

  • जनता में पहचान और भरोसा

MGNREGA की कमियां

  • केवल अस्थायी रोजगार

  • भुगतान में देरी

  • कौशल और स्थायित्व की कमी

यह नया ढांचा कितना लाभकारी हो सकता है?

VB-GRAMG केवल मजदूरी देने की बजाय आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
लंबी अवधि में इससे:

  • ग्रामीण आय स्थिर हो सकती है

  • पलायन कम हो सकता है

  • गांव आत्मनिर्भर बन सकते हैं

इसे MGNREGA का अगला और स्वाभाविक रूप माना जा सकता है।

आम लोगों के जीवन पर संभावित प्रभाव

ग्रामीण मजदूर:

  • अधिक दिन काम

  • बेहतर आय सुरक्षा

युवा:

  • कौशल आधारित आजीविका

  • स्थानीय रोजगार

महिलाएं:

  • स्थायी आय के अवसर

  • ग्राम स्तर पर सशक्तिकरण

किसान:

  • कृषि मौसम में राहत

  • जल और अवसंरचना सुधार

ग्राम पंचायत:

  • बेहतर योजना

  • राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ाव

निष्कर्ष

VB-GRAMG, MGNREGA को समाप्त करने के बजाय उसे आधुनिक और भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में एक कदम है।
यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह ग्रामीण भारत के विकास में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. क्या VB-GRAMG, MGNREGA की जगह लेगा?
नहीं, इसे MGNREGA का उन्नत और विस्तारित रूप माना जा रहा है।

Q2. VB-GRAMG में कितने दिन का रोजगार प्रस्तावित है?
125 दिन प्रति ग्रामीण परिवार।

Q3. क्या VB-GRAMG आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है?
फिलहाल यह एक प्रस्तावित/नीति-स्तरीय ढांचा है। अंतिम अधिसूचनाएं जारी होना बाकी है।

Q4. क्या MGNREGA जॉब कार्ड मान्य रहेगा?
शुरुआती चरण में मौजूदा MGNREGA जॉब कार्ड को ही मान्य रखा जा सकता है।

Q5. यह कब से लागू हो सकता है?
आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

Disclaimer
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नीति-स्तरीय जानकारी, विश्लेषण और सरकारी प्रस्तुतियों पर आधारित है। VB-GRAMG से जुड़े अंतिम नियम और क्रियान्वयन संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं के अधीन होंगे।


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